बंगाल में दुर्गा पूजा के त्यौहार को बहुत हीं धूम-धाम से मनाया जाता है। माँ दुर्गा के आने से पहले पूजा दुगा पूजा मनाने के लिए उत्सुक हैं बंगाल के लोग। माँ दुर्गा की पूजा के लोग उथल-पुथल मचा रहे हैं। नहीं, लेकिन आज की मां एक कहानी नहीं है। बल्कि आज मालदा जिला पुलिस सुपर कार्यालय के एक व्यक्ति का है। जिनका नाम बिष्णुपाद साहा है। दिन में,अपने काज काम को निपटा कर रात के समय में,ये पुलिस कर्मचारी कलाकार का रूप ले लिया करते हैं। कौन सा ऐसा कौन से काम नहीं करते है ये कर्मचारी,फिर भी ये रात में एक बहुत अच्छे कलाकार के तरह काम करते हैं। कृष्ण्कालीतोला शहर के क्षेत्र में अपने घर में हीं रात में जग-जग कर ये व्यक्ति माँ दुर्गा की मुर्ति तैयार कर रहे हैं। हालाँकि ये अपने घर कई आस-पास के पाँच कलाकारों से अलग तरीके की मुर्ति बना रहे हैं। माँ की मुर्ति बनाने का मुख्य उपकरण मिट्टी नही है। बल्कि मछली पकड़ने वाली रस्सी है। जिस धागा से नदी में मछली पकड़ी जाती है,उसी धागा का प्रयोग कर के उस व्यक्ति ने माँ की प्रतिमा बनाई है। आधुनिकता तौर पर इस बंगाली व्यक्ति के भाव से भरी इस मुर्ति को आँखों से दूर करना संभव नही है। कलाकार बिष्णुपाद साहा ने कहा कि,उनकाइस काम का मुख्य आकर्षण बंकुरा डोका कला का आकर्षण है। केवल इस बार ही नही। बल्कि वह पिछले कुछ वर्षों से वह माँ की प्रतिमा बना रहे हैं। प्रयुक्त सामग्री के साथ उन्होंने इस मुर्ति को बनाया है। उदाहरण के लिए, परित्यक्त टायर ट्यूब,टूटी हुए मिट्टी की बर्तन, नारियल खोपड़ी आदि। इन्होने 2015 में अपने हाथ से माँ की प्रतिमा कागज से बनाकर बांग्लादेश में नामांकित किये थे। हालांकि यह कलाकार स्थिर होकर कड़ी मेहनत कर रहे हैं और अपने काम को जारी रख रहे हैं।
মালদা